हेमंत सोरेन सीमित संसाधनों में कोरोना संकट से कर रहे संघर्ष

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ऐक्शन में दिखे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। मंगलवार को धनबाद नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
ऐक्शन में दिखे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन। मंगलवार को धनबाद नगर निगम के कुछ अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
  • ओमप्रकाश अश्क
रिपोर्ट- ओमप्रकाश अश्क
ओमप्रकाश अश्क

रांची। हेमंत सोरेन सीमित संसाधनों में कोरोना संकट का सामना बड़ी शिद्दत से कर रहे हैं। बिना किसी आरोप-प्रत्यारोप के महामारी से जूझ रहे हैं। उनके मंत्री कई बार केंद्र सरकार के खिलाफ असहयोग का आरोप भी लगा देते हैं, लेकिन हेमंत बहैसियत मुख्यमंत्री कभी को शिकवा-शिकायत नहीं करते। उन्हें भी केंद्र की मदद की जरूरत है, पर कभी इसके लिए केंद्र को कोसते नहीं। लाक डाउन  में लोगों की परेशानी को ध्यान में रख कर उन्होंने मुफ्त दाल-भात केंद्रों की व्यवस्था करायी है। उनका एक ही मकसद है कि संकट की इस घड़ी में झारखंड का कोई गरीब भूख से न मरे।

हेमंत कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित लाक डाउन का भी पालन करने में भी कहीं से चूक नहीं रहे। जब उन्हें एहसास हुआ कि कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में लाक डाउन का पालन कराना झारखंड पुलिस के बूते की बात नहीं तो उन्होंने बेहिचक केंद्रीय सुरक्षा वाहिनी (सीआरपीएफ) की तैनाती में भी संकोच नहीं किया। इसके लिए विपक्षी कह सकते हैं कि उनकी झारखंड पुलिस नाकाम रही। लेकिन सच कहें तो हेमंत की बेलौस कार्यशैली का यह अंदाज है।

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हेमंतो सोरेन ने प्रधानमंत्री को भेज पीड़ा का इजहार किया (पहला पेज)
हेमंतो सोरेन ने प्रधानमंत्री को भेज पीड़ा का इजहार किया (पहला पेज)

उनका शासन कैसा होगा, इसका एहसास तो उन्होंने उसी दिन करा दिया था, जब भाजपा को शिकस्त देकर मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने प्रधानमंत्री से मिल कर केंद्र सरकार के साथ तालमेल से सरकार चलाने का भरोसा दिया। राष्ट्रपति से मिल कर उन्होंने सरकार के सौहार्द का परिचय दिया। यह अलग बात है कि इसके बावजूद केंद्र से झारखंड को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। खाली खजाने के साथ सत्ता संभालने वाले हेमंत ने जीएसटी और रायल्टी के हिस्से की बकाया रकम कई बार मांगी। लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी बात अब तक अनुसुनी ही रखी है।

कोरोना काल में भी केंद्र से महज 286 करोड़ रुपये मदद के तौर पर मिले हैं। झारखंड खनिज रूप से संपन्न होते हुए भी देश का गरीब राज्य है। रोजगार के साधन नहीं हैं, जिससे बड़े पैमाने पर लोग रोजी-रोटी की तलाश में राज्य से बाहर जाते हैं। गरीबी की वजह से झारखंड से बच्चियों की सर्वाधिक तस्करी होती है। केंद्र ने इसके पहले राज्य में भाजपा की सरकार होने के नाते, जितनी मदद की, उसका आधा-तिया भी कर दे तो शायद सूबे की स्थिति में परिवर्तन हो जाये।

हेमंतो सोरेन ने प्रधानमंत्री को भेज पीड़ा का इजहार किया (दूसरा व अंतिम पेज)
हेमंतो सोरेन ने प्रधानमंत्री को भेज पीड़ा का इजहार किया (दूसरा व अंतिम पेज)

केंद्रीय सहयोग की वास्तविकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो बार प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों के साथ वीजियो कांफ्रेंसिग की। झारखंड के मुख्यमंत्री को बोलने तक का मौका नहीं दिया गया। इस बीच झारखंड से बाहर गये लोगों को वापस लाने का नैतिक दबाव राज्य सरकार पर बढ़ गया है। खासकर तब, जब उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश जैसी कई राज्य सरकारों ने अपने लोगों को दूसरे प्रदेशों से बुला लिया है। हेमंत वीडियो कांफ्रेंसिंग में अपनी पीड़ा पीएम को बताना चाह रहे थे, लेकिन उन्होंने दोनों बार मौका नहीं दिया गया। आखिरकार उन्हें पीएम को पत्र लिखना पड़ा। पत्र के मजमून शालीन हैं और गिला-शिकवा के बदले उसमें आग्रह का भाव ज्यादा है।

झारखंड में अगर सरकारी स्तर पर कोई चूक हुई है तो वह है लाक डाउन के बावजूद एक मंत्री के निर्देश पर राज्य में एक शहर से दूसरे शहर बसों में लाद कर लोगों को अपने घर जाने की व्यवस्था की गयी। अगर इसे उल्लंघन मानें तो इससे बड़ा उल्लंघन तो उन राज्य सरकारों ने की है, जो दूसरे राज्यों से अपने यहां के प्रवासी लोगों को बसों में भेज कर लाये। उत्तर प्रदेश सरकार ने तो 200 एसी बसें भेज कर राजस्थान के कोटा से अपने बच्चों को बुलवाया।

हेमंत सोरेन ने क्या लिखा पीएम को भेजे गये पत्र में

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि कोरोना के नियंत्रण हेतु भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत समय-समय निर्गत किये गए आदेश  का झारखंड राज्य में अक्षरश: अनुपालन हेतु राज्य सरकार द्वारा ठोस कार्रवाई की गयी है। राज्य सरकार ने इन आदेशों के विपरीत न तो कोई आदेश निर्गत किया है और न ही कोई कार्यवाही की है। परंतु समाचार पत्रों तथा टीवी चैनलों के माध्यम से जो जानकारी प्राप्त हो रही है, उससे पता चलता है कि अन्य राज्यों द्वारा भारत सरकार के उपरोक्त आदेशों का घोर उल्लंघन करते हुए प्रतिदिन कई कार्रवाई की जा रही है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री का दूसरे राज्यों में झारखंड के  छात्रों एवं मजदूरों को अपने राज्य में वापस लाने हेतु ध्यान आकृष्ट करते हुए सूचित किया कि झारखंड के 5 हजार से ज्यादा बच्चे कोटा तथा देश के अन्य शहरों में लॉक डाउन के कारण फंसे हुए हैं। साथ ही लगभग 5 लाख से अधिक झारखंड के मजदूर जो अन्य राज्यों में रोजगार की तलाश में गए थे, आज अपने राज्य वापस आना चाहते हैं। बार-बार गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें वापस लाने का प्रबंध राज्य सरकार करे।  भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा  दिनांक 15 अप्रैल 2020 को जारी आदेश  में लिखा है कि 3 मई 2020 तक व्यक्तियों का इंटर-स्टेट आवागमन मना है। आदेश का उल्लंघन डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत आपराधिक होगा। झारखंड सरकार ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहती है, जो भारत सरकार के आदेशों के उल्लंघन की श्रेणी में दर्ज हो। परंतु प्रतिदिन यह जानकारी प्राप्त हो रही है कि कुछ राज्य आपसी सहमति से बड़े पैमाने पर छात्रों का इंटर-स्टेट आवागमन करवा रहे हैं। जबकि गृह मंत्रालय द्वारा ऐसा करने के लिए कोई रियायत नहीं दी गयी है।
भारत सरकार के निर्देशों के विपरीत की गई कार्रवाई सिर्फ इस आधार पर बाध्य नहीं हो सकती कि यह कार्य संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री की आपसी सहमति से किए गए हैं। ऐसे राज्यों से केंद्र सरकार द्वारा किसी प्रकार का स्पष्टीकरण पूछे जाने या डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के प्रावधानों के तहत इनके विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई किए जाने का कोई भी मामला सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री हेमंत ने कहा कि जनमानस में ऐसी धारणा बन रही है कि इन राज्यों को भारत सरकार के गृह मंत्रालय की मौन सहमति प्राप्त है। बच्चों के अभिभावक, मजदूरों के रिश्तेदारों, जनप्रतिनिधि तथा अन्य बुद्धिजीवियों द्वारा अन्य राज्यों की तरह हमारे बच्चों तथा मजदूरों को वापस लाने की व्यवस्था करने का लगातार दबाव सरकार पर बनाया जा रहा है। परंतु भारत सरकार के आदेश के सम्मान के कारण झारखंड सरकार ऐसा करने में अपने आप को असमर्थ महसूस कर  रही है।
झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में उभर रहे आक्रोश के बारे में उन्होंने विशेष रूप से बीएम को अवगत कराया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निवेदन किया कि प्रधानमंत्री गृह मंत्रालय को निर्देश दें कि इन राज्यों में फंसे बच्चों को वापस लाने के लिए आदेश निर्गत करे, ताकि केंद्र सरकार के सहयोग से वैधानिक रूप से इस कार्य को पूरा किया जा  सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन राज्यों द्वारा इस कार्य को बिना केंद्र के आदेश के किया जा रहा है, उन राज्यों के वरीय पदाधिकारियों को भविष्य में न्यायालयों में अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इससे पदाधिकारियों का मनोबल गिरेगा तथा प्रशासन पर इसका कुप्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।

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