हेमंत सोरेन अपने वादे पर खरा उतरे, आने लगे प्रवासी मजदूर

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रेलवे ने 30 जून तक ट्रेनों का परिचालन रोक दिया है। हालांकि इस दौरान स्पेशल ट्रेनों का परिचालन जारी रहेगा।  प्रवासी श्रमिकों व छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं। 
रेलवे ने 30 जून तक ट्रेनों का परिचालन रोक दिया है। हालांकि इस दौरान स्पेशल ट्रेनों का परिचालन जारी रहेगा।  प्रवासी श्रमिकों व छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं। 
जो कहा, वह कियाः झारखंड के मुख्यमंत्री के हेमंत सोरेन
जो कहा, वह कियाः झारखंड के मुख्यमंत्री के हेमंत सोरेन

रांची। हेमंत सोरेन अपने वादे पर खरे उतरे हैं। झारखंड के प्रवासी मजदूरों की ट्रेन से पहली खेप रांची के लिए रवाना हो गयी है। तेलंगाना से चली ट्रेन देर रात पहुंचेगी। ट्रेन सीधे हटिया आएगी। केंद्र की गाइडलाइन के मुताबिक मजदूरों को लाने की छूट मिली थी, लेकिन बसों से ही ले जाने की शर्त रखी गयी थी। हेमंत सोरेन ने केंद्र से आग्रह किया था कि स्पेशल ट्रेन से झारखंड के प्रवासी मजदूरों को लाने की इजाजत दी जाये। रेल मंत्रालय ने उनकी बात मान ली है।

इससे पहले हेमंत सोरेन की सरकार ने कल ही निकटवर्ती राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए बसें भेजी थीं। आज उनकी भी वापसी हो रही है। बिहार और दूसरे राज्यों ने भी स्पेशल ट्रेन से ही प्रवासियों को लाने की मांग थी, लेकिन वे पिछड़ गये। उल्टे बिहार सरकार के ममुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने यह कह कर अपनी किरकिरी करा ली कि बसों से बिहार के मजदूरों को लाना उनके बूते की बात नहीं। इस पर जनता में कड़ी प्रतिक्रिया हो रही है।

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बच्चों को लाने के लिए 50 बसें भेजी हैं। आरजेडी के नेता भी इसके बाद चर्चा में आये, जब उन्होंने 2000 बसें भेजने का एलान किया। हालांकि उनकी बसें कब जाएंगी, इस पर अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ है। भाजपा-जदयू ने उनके एलान पर यह कह कर टिप्पणी की कि वे पहले बसों के नंबर तो बतायें। इस बीच झारखंड के लिए ट्रेन देकर केंद्र सरकार ने अपनी दरियादिली दिखायी है।

तेलंगाना से झारखंड के लिए चली 24 कोच वाली स्पेशल ट्रेन में 1200 लोग सवार हैं। इसे पूरी तरह सैनिटाइज कर लाक डाउन के तहत सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए रवाना किया गया है। प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए रेलवे द्वारा चलायी गयी  यह पहली ट्रेन है।

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लाक डाउन की वजह से तेलंगाना के लिंगमपेल्ली में फंसे झारखंड के मजदूरों को लेकर अभी एक स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की गई है। बताया जा रहा है कि यह च्रेन भोर में झारखंड के हटिया स्टेशन पहुंचेगी। इसेक साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे लाखों मजदूरों को घर लाने का काम शुरू हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की इजाजत मिलने के बाद अलग-अलग राज्यों की सरकारें बसों से अपने राज्य के मजदूरों को वापस लाने में जुटी हैं।

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बिहार समेत दूसरे राज्यों ने भी केंद्र से अपील की है कि मजदूरों को वापस लाने के लिए स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की जाये। उनके आग्रह पर अभी तक केंद्र का कोई आधिकारिक बयान तो नहीं आया है, लेकिन तेलंगाना से झारखंड के मजदूरों को लेकर लिए चली इस ट्रेन के बाद उम्मीद की जा रही है कि दूसरे राज्यों के लिए केंद्र सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी। यह भी संभव है कि भगदड़ मचने के भय से स्पेशल ट्रेन रवाना होने की बात को गोपनीय रखा गया हो।

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शुक्रवार सुबह 5 बजे तेलंगाना के लिंगमपेल्ली से चली इस ट्रेन के आज रात 11 बजे तक झारखंड के हटिया पहुंचेने का शिड्यूल है। लेकिन लंबी दूरी के कारण भोर तक इसके पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। ट्रेन में कुल 24 कोच हैं और इसमें सवार मजदूरों की संख्या 1200 बतायी जा रही है।

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