सचिन तेंदुलकर अंपायरों के निशाने पर सबसे ज्यादा रहे

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सचिन तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर
  • वीर विनोद छाबड़ा 

सचिन तेंदुलकर अंपायरों के निशाने पर शायद सबसे ज्यादा रहे हैं। बताया जाता है वे 39 बार गलत फैसलों के शिकार हुए। अंपायर से गलतियां होती रहती हैं। लेकिन इंटरनेशनल मैच में छोटी-सी भी गलती मैच का रुख बदल देती है। लेकिन कोई किसी का कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता। बस कड़वी यादें शेष रह जाती हैं। हालांकि शायद ही कोई बैट्समैन ऐसा रहा हो, जो अंपायर की नजर का शिकार न हुआ हो। लेकिन इंडिया के सचिन तेंदुलकर अंपायरों के निशाने पर शायद सबसे ज्यादा रहे हैं। बताया जाता है वो 39 बार ग़लत फैसलों के शिकार हुए। ऐसा क्यों हुआ कि दुनिया भर के अंपायर उनके पीछे पड़े रहे। ये कोई साज़िश है या संयोग? इस पर चर्चा फिर कभी।

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आज चर्चा का विषय है सचिन का ‘लेग बिफोर विकेट’ आउट होना नहीं बल्कि ‘शोल्डर बिफोर विकेट’ आउट होना। हुआ यों कि 13 दिसंबर 1999 को एडिलेड टेस्ट में चौथे दिन ऑस्ट्रेलिया ने इंडिया को 396 रन बना कर जीतने की चुनौती दी। बहुत मुश्किल नहीं तो आसान भी नहीं था। लेकिन इंडिया के बल्लेबाज़ों ने इसे बेहद मुश्किल बना दिया। मात्र 24 रन बना 3 विकेट गिर गए। अब सारा दारोमदार सचिन के कन्धों पर था। वो टीम के कप्तान भी थे। वो मैच जीतने के लिए जाएंगे या बचाने के लिए? वैसे आम राय थी कि अगर सचिन का बल्ला कुछ भी करने में सक्षम है।

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सचिन ने फास्ट बॉलर ग्लेन मैक्ग्राथ की चार गेंदे खेलीं। कोई रन नहीं बना। पांचवीं गेंद तनिक बाउंस लिए हुए रही। सचिन ने समझा कि शायद ये कमर से थोड़ा ऊंचा जायेगी। वो लगभग बैठ गए। लेकिन उनका फ़ैसला गलत साबित हुआ। गेंद ने ज़्यादा नहीं लिया और उनकी कंधे के ऊपरी हिस्से में लगी। मैक्ग्राथ सहित तमाम फील्डरों ने एक स्वर में एलबीडब्ल्यू की ज़बरदस्त अपील की। अंपायर डेरल हार्पर की उंगली तुरंत उठ गयी। सचिन को हैरानी हुई। टांग पर गेंद लगी नहीं और गेंद स्टंप छोड़ती हुई जा रही थी। कुछ क्षण सचिन स्तब्ध खड़े रहे और फिर धीमे क़दमों से चल दिए। अंततः ये टेस्ट ऑस्ट्रेलिया ने 285 रन के बड़े फर्क से जीता।

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बाद में इस पर काफी बहस हुई कि विकेट के सामने तो सचिन का कंधा था, फिर वो लेग बिफोर कैसे आउट करार दिए गए। दरअसल, नियमों में भी कंधे विशेष का कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन ये साफ़ लिखा है कि यदि विकेट के सामने खिलाड़ी के जिस्म का कोई भी हिस्सा आता है तो वो ‘लेग बिफोर विकेट’ करार दिया जाएगा। सवाल ये पैदा होता है कि क्या गेंद विकेट छोड़ते हुए निकल रही थी? इस सवाल का जवाब कोई नहीं दे सकता, सिवाय अंपायर हार्पर के। और हार्पर की नज़रें धोखा भी खा सकती हैं क्योंकि वो इंसान हैं। इंसान से गलतियां होती रहती हैं। अगर उस ज़माने में डीआरएस सिस्टम रहा होता तो सचिन रिव्यु में ज़रूर जाते। और सच्चाई सामने आ जाती।

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वैसे रिव्यु सिस्टम से भी कई बार गलतियां हुई हैं क्योंकि इसके पीछे भी इंसान ही बैठा है। वैसे मैक्ग्राथ का मानना था कि सचिन आउट थे क्योंकि उनकी ऊंचाई कम थी और उनके कंधे पर लगी गेंद सीधे विकेट को ही लगती। कुछ भी हो, उस फैसले का आज भी ‘शोल्डर बिफोर विकेट’ कह कर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों और अंपायर हार्पर का मज़ाक उड़ाया जाता है।

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