राजीव गांधी पर मोदी का बयान भाजपा पर कहीं भारी न पड़ जाये

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राजीव गांधी
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  • मिथिलेश कुमार सिंह

नयी दिल्ली। राजीव गांधी पर मोदी का बयान भाजपा पर कहीं भारी न पड़ जाये। सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी की भारी किरकिरी हो रही है। कांग्रेस समर्थक खेमा सक्रिय हो गया है। पढ़ा-लिखा तबका भी इससे खफा है। मोदी ने बस्ती की एक सभा में कहा था कि राजीव गांधी को लोगों ने मिस्टर क्लीन बनाया था, लेकिन भ्रष्टाचारी के आरोप के साथ वह दुनिया से विदा हुए। राजीव गांधी पर टिप्पणी कर कांग्रेस को चुनाव के समय बैठे-बिठाये मोदी ने मुद्दा दे दिया है।

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देश में अब यह चर्चा होने लगी है कि मोदी ने हताशा में ऐसा बयान दिया है। राहुल गांधी तो इस पर सीधे हमलावर हो गये हैं। उनका कहना है कि विदाई की वेला में मोदी ऐसा बोल रहे हैं। हाल के दिनों में राहुल गांधी का आत्मविश्वास जितना बढ़ा दिखता है, उसके कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि सच में भाजपा इस बार के चुनाव में वह तेवर नहीं दिखा पा रही है, जो उसने 2014 में दिखाया था। विकास की बात इस चुनाव में बेमानी हो गयी है। उपलब्धियों को गिनाने के बजाय भाजपा बिगड़ी भाषा में सिर्फ आरोप लगा रही है। खासकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह।

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विश्लेषक मानते हैं कि 2014 में नरेंद्र मोदी ने रोजगार और काला धन विदेशों से लाकर आम जन के खाते में 15 लाख रुपये देने का वादा किया था। इससे जनता में खासा उत्साह था और उनको आम जन के साथ युवाओं का भरपूर समर्थन मिला। पांच साल में काला धन तो वापस नहीं आया, उल्टे विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे कई लोग बैंकों की बड़ी पूंजी लेकर विदेश बाग गये। रोजगार मिलने के बजाय छंटनी के हालात देश में पैदा हो गये। जेय एयरवेज के बंद होने से बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए तो बीएसएनएल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ने छंटनी का प्लान बनाया। सरकारी रोजगार बंदप्राय है।

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भाजपा के पास विकास, रोजगार जिससे ज्वलंत मुद्दों पर न कुछ बताने के लिए रह गया है और न कोई नया वादा ही उसके पास बचा है। अलबत्ता वह भावनाओं को भुनाने के प्रयास में लगी है। कहीं पुलवामा के शहीदों के नाम पर वोट मांग रही है तो कहीं मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित कराने की अपनी कूटनीतिक कामयाबी बता रही है। पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक को वह अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। कश्मीर से धारा 370 हटाने का वादा कर रही है।

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इन सबके बीच उसके सहयोगियों की बात करें तो बिहार के साथी दल जदयू ने कश्मीर के सवाल पर अपनी अलग धारणा के मद्देनजर इस बार पार्टी का घोषणापत्र ही जारी नहीं किया। दरभंगा की सभा में नरेंद्र मोदी खड़े होकर लोगों से वंदे मातरम का नारा लगवा रहे थे तो जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौन साधे बैठे रहे। शायद उनकी चुप्पी का एहसास मोदी को हो गया और उन्होंने मधुबनी में हर बार की तरह वंदे मातरम का नारा नहीं लगवाया। उस सभा में मंच पर नीतीश कुमार भी बैठे थे।

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अब तक तकरीबन लोकसभा की आधी सीटों पर हो चुके चुनावों के बारे में विश्लेषक अनुमान लगा रहे हैं कि भाजपा को अपने कमजोर पड़ने का आभास हो गया हैष इसीलिए उसके नेताओं ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। इस बार के चुनाव में पिछली बार की तरह एकतरफा लड़ाई नहीं है, बल्कि यूपीए और एनडीए उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर ग्राउंड रिपोर्ट से मिल रही है।

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