मलिकाइन लिखले बाड़ी- हंसुआ के बियाह में खुरपी के गीत

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गांव का एक दृश्यः तसवीर बाबूलाल जी
गांव का एक दृश्यः तसवीर बाबूलाल जी
मलिकाइन के पाती
मलिकाइन के पाती

मलिकाइन लिखले बाड़ी- हंसुआ के बियाह में खुरपी के गीत। नेता लोग वोट खातिर ऊ कुल बोले लागल बा लोग, जवना के जरूरते नइखे। केकरा जांगर में केतना दम बा, ई लोग आपस में फरियावे के जगहा पूत काटी-भतारगाड़ी जइसन गंवार मेहरारुन के झगड़ा में लागत बा लोग। पढ़ीं मलिकाइन के पूरा पाती-

पावं लागीं मलिकार। गजबे अबकी वोट होता मलिकार। गंवार मेहरारून अइसन नेतवा  कवनो नेतवन के खेल ह, जवनी गंतिया लरिकाईं में हमनी चार-सिपाही खेलल करीं जा। बाकिर बात में बुझाइल कि ई त वोट के बतकही हो रहल बा। मरदापुर के मउसी के बड़का बेटवा आइल रहे एक दिन। पूछनी कि ए बाबू, तोहार नाम का ह। त बतवलस कि चकुदार डागा सिंघ। हम पूछनी कि चकुदारी के नोकरी कब धइलS हा। त ऊ कहलस कि ए बहिना, तोरा ई ना बुझाई। बड़का मोदी जी अपना के चकुदार कहतारे। हम उनकर भगत हईं। एही से नाम के आगे चकुदार लगा लिहले बानी। उहे बतवलस कि इनरा गांधी के पोतवा पपुआ मोदी जी के कहले बा कि चकुदार चोर है। अबकी त ससुर के नानी इयाद आ जइहें।

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रउरा त जनबे करीले मलिकार, हमरा एह कुल से मतलब ना ह। बाद में पांड़े बाबा के मुंह से सुननी, तब ममिला तनी बुझाइल। उहां के बतावत रहवीं कि मोदी जी कहले कि हम चकुदार हईं। त सोनियां गांधी के बेटा कहले कि चकुदार चोर है। ममिला बड़की कचहरी ले पहुंच गइल। बाद में सोनिया गांधी के बेटा एह खातिर माफी मंगले बाड़े। उहें के बतावत रहवीं कि दिल्ली वाला मोदी जी अपना के चकुदार कहले आ बतवले कि जबले उनका लगे चकुदारी के नोकरी रही, तबले चोर लोग के खैरियत नइखे। बाद में इनरा गांधी के पोता कहले कि चकुदार चोर बा। मोदी जी के देखादेखी उनकर भगत लोग अपना नाम के संगे चकुदार लिखे लागल।

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काल्ह पांड़े बाबा सुनात रहवीं कि मोदी जी एगो बड़का अनेत काम कइले बाड़े। मुअला आदमी के बरस्ट कहले बाड़े। हमनी के अइसन संस्कार ना ह। मुअला पर केहू ओह आदमी के शिकायत ना करेला। हमरो खराब लगुवे। लड़त बानी त आपस में फरिया लीं। गंवार मेहरारू अइसन पूतकाटी, भतारगाड़ी जइसन गारी के संगे भैंसा लड़ान काहे होता। सभे थूकम-फजीहत में लागल बा। केहू केकरो से कम नइखे। अब त बुझाता मलिकार कि माई-बहिन के गारी एह चुनाव में बाकी रह गइल बा।

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अबहीं ले हम आठ बेर वोट दिहले बानी। परचारो देखले-सुनले बानी। केहू के अइसन लंगटई नइखीं देखले। गाड़ल मुर्दा अबकी बेर उखाड़ के लोग थूकम-फजीहत में लागल बा। पहिले परचार होखे त नेता लोग भाषण देव। आपन कइल काम गिनावे। आगे का करे के इरादा बा, ई बतावे। अब त तें चोर त तोर बाप चोर जइसन बतकही भाषण होता। पांड़े बाबा कहत रहवीं कि मोदी जी ई एगो काम नीमन नइखन कइले। उनका ओह आदमी के चोर कह के का मिले वाला बा। उल्टे हमरा अइसन (पांड़े बाबा) लोग एइसे खिसिया गइल बा। ओही में चोन्हर साव के नतिया कहे लगुवे कि अबकी इहे बात मोदी जी के ले डूबी।

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एह घरी घसेटउआ फोनवो पर खबर आवता मलिकार। पांड़े बाबा के बड़की बेटिया बतावत रहुवे कि दिल्ली में कालेज के मास्टर लोग एह पर खिसियाआइल बा। ऊ लोग चिट्टी लिखले बा। कई जाना खबर कागज वाला भी रिसियाआइल बा। किसिम-किसिम के बतकही होता। केहू कहता कि जेकरा के कोट-कचहरी बेईमान ना साबित क पावल, ओकरा बारे में मोदी जी के बतकही ठीक नइखे। एकर खराब असर उनका पर परी। एक जाना त कहे लगुवन कि मोदी जी हारत बाड़े। एही से ऊटपटांग बतकही उनका मुंह से निकलत बा।

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जाये दीं, जल्दी ओराव वोट त कवनो नीमन बतकही सुने के मिले। एने खूब गर्मी परत बा मलिकार। लूह चलत बा। लोग कहत बा कि अबकी खूब गरमी पड़ी। रउरा ठीक से रहेब। बाहर निकलेब त भर पेट पानी पी के। मुंह-माथा गमछा से ढांक के निकलेब। छानल-बघारल मत खायेब। बेल के शरबत मिले त रोज पीयल करेब। ना होखे त बूंट के सतुआ संगे राखेब। रोज घोर के पी लेब। जान बा त जहान बा।

राउरे, मलिकाइन

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