मलिकाइन के पाती- लोग अइसन जान देता, बुझाता घोंधा में बसल बा परान

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मलिकाइन के पाती ढेर दिन बाद आइल बा। लिखले बाडी़- लोग अइसन जान देता, बुझाता घोंधा में बसल बा परान। रोज-रोज लोग के जान-परान देबे के खबर सुने में आवता।
मलिकाइन के पाती ढेर दिन बाद आइल बा। लिखले बाडी़- लोग अइसन जान देता, बुझाता घोंधा में बसल बा परान। रोज-रोज लोग के जान-परान देबे के खबर सुने में आवता।

मलिकाइन के पाती ढेर दिन बाद आइल बा। लिखले बाडी़- लोग अइसन जान देता, बुझाता घोंधा में बसल बा परान। रोज-रोज लोग के जान-परान देबे के खबर सुने में आवता। पढ़ीं, उनहीं के भाषा में पूरा पातीः पांव लागी मलिकार। केतना दिन से हम एगो बात लेके परेशान बानी। एगो त उफरपरना कोरना (कोरोना) सभका के तबाह कइले बा, ऊपर से लोग एह तरे जान-परान गंवावे लागल बा कि बुझाते नइखे कि ई कहवां जा के रुकी। हमरा इयाद परेला मलिकार अपना नानी के बतकही। उनका जब हाड (हार्ट) के बेमारी भइल त नाना बराबर कहस- टाइम पर दवाई ना खइबू त जल्दीए चल जइबू। एह पर नानी के जवाब होखे कि परान घोंघा में बसल बा का। ई ओह बेमार नानी के जीवट रहे। अब त अइसन भइल बा मलिकार कि छने में लोग फांसी लगा लेता भा जहर खाके जान दे देता। बुझाता कि सचहूं परान घोंघे में बसल बा।

पांड़े बाबा आज खबर कागज पढ़ के लोग के सुनावत रहनी हां। रोज भोरे उहां का खबर कागज पढ़ के लोग के सुनावल-बतावल करी ले। आज उहां के कहत रहवीं कि कोरना अइसन कइले बा कि लोग अगुता गइल बा। केहू के नौकरी छूट गइल बा त केतने लोग के नौकरी के उमेद खतम हो गइल बा। दउरी-दोकान दू महीना त खुलबे ना कइल हा, अब खुलल बा त खरीदारे नइखन। बियाह-शादी में खाना बनावे वाला, टेंट-सामियाना वाला, दउरी-दोकान वाला सभे परेशान बा। गहना-गुरिया आ कपड़ा-लत्ता के खरीदारी त होते नइखे। लगन में गाड़ी चला के कमाये के इंतजार सबका रहेला। एह लगन में त एको नेवते ना आइल। रुपिया-पइसा के सबका तंगी हो गइल बा। जवनी गंतिया कोरना दिन पर दिन बढ़ल जाता, ऊ देख के लोग के अइसन बुझाता कि कि कबले ई हाल रही, कहल मुशकिल बा। एही से लोग सबसे आसान आपन परान तियागल बूझ लेले बा।

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बांड़े बाबा आजे के खबर पढ़ के बतावत रहुवीं कि रांची में एगो कवनो होटल वाला के जवान लड़िका फंसरी लगा के जान दे दिहले बा। धनबाद में पच्चीस-तीस साल के पांच गो जवान लड़िका-लड़की एके दिने जान दे दिहले बाड़े सन। भागलपुर में मास्टरी के पढ़ाई कइल लड़िका नौकरी ना मिलला पर फांसी लगा लिहलस। एकरा संगे-संगे मार-काट त अइसन मचल बा कि पांच गो नक्सली के पुलिस मरलस त नक्सलिया दू आदमी के जान ले लिहले सन।

एही संगे पांड़े बाबा इहो बतावत रहवीं कि जब से लोक डाउन (लाकडाउन) भइल बा, तब से दू महीना में देश में 338 लोग अपना के अपने मार दिहल। चंडीगढ़ में 28 लोग आ लुधियाना में 100 से अधिका लोग जान दे दिहल। पांड़े बाबा इहो सुनावत रहुवीं कि कलकत्ता में जेतना लोग रोज जान अपने से ले लेत रहल हा, ऊ एह घरी डबल गइल बा। तीन महीना में खाली कलकत्ता में 92 आदमी फांसी लगा के जान दे दिहले बा। जहां से सेब आवेला मलिकार, ओकरा के हिमाचल नू कहल जाला। ओइजा दू महीना में 122 लोग जान दे दिहल। झारखंड में तीन महीना में 449 लोग जान दे दिहल। बिहार में त पहिले जान देबे वाला लोग कम रहल हा, बाकिर अब ओहू जा ई बढ़े लागल बा।

लोग के धीरज जवाब दे रहल बा मलिकार। पहिले लोग दुख-सुख काट लेत रहल हा, ई कह के भागवान जवन लिखले बाड़े, ओकरा के भोगहीं के परी। इहो कही लोग कि जाही विधि राखे राम। अब एतना धीरज केहू में नइखे बांचल। एगो त सरकारी नोकरी खत्म भइल जा तारी सन। कोरना पराइवेटो पर गरहन लगा दिहले बा। पहिले लोग के रहन-सहन सादा रहत रहल हा। अब त सभ केहू खरचा बढ़ा लिहल। रउरे नू बताई ले मलिकार कि तीन कोस कवलेज (कालेज) जाये खातिर रउरा लगे साइकिल ना रहे। तबो पढ़नी नू। नोकरियो तीस बरिस के बादे नू मिलल, बाकिर रउरा ना नू घबरइनी। अब त लोग के मोटर साइकिल, कार त चहबे करी। रउरा बलुआ पर के इस्कूल में बोरा पर बइठ के पढ़ले बानी। मिडिल स्कूल ले रउरा गोड़ में इस्कूल जाये खातिर चप्पल पहिरे के ना मिलल। अब त दुआरी पर गाड़ी आवतारी सन। लड़िका बन-ठन के इस्कूल जा तारे सन। फीस सुन के त दांत लाग जाई। इहे कुल से नू आदमी के धीरज अब जवाब देता।

जाये दीं मलिकार, हमहू कवन पुरान (पुराण) लेके बइठ गइनी। कहवां आपन हाल-चाल बतावे आ राउर पूछे के चाहीं त हम दोसरे सुनावे-बतावे लगनी। अबही ले काली माई के किरपा आ बरम बाबा के आशीर्वाद से हमनी के ठीक बानी सन। देवता-मुनी से हम इहे गोहरावत रहीले के रउरो जहां रहीं, ठीक रहीं। धनरोपनी शुरू हो गइल बा। दू बिगहा हमहू रोपवा दिहनी। बाकी त बंटइये बा। बरखा खूब होता। अइसन रहल त असों धान नीमन होखे के चाहीं। बाकी अगिला पाती में।

राउरे, मलिकाइन

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