मलिकाइन के पाती- ठांव गुने काजर, कुठांव गुने कारिख

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गांव की तस्वीर बाबूलाल जी के सौजन्य से
तस्वीर बाबूलाल जी के सौजन्य से

मलिकाइन के पाती आइल बा। पावं लागी मलिकार। एह घरी त राउर काम बढ़ गइल होई। जब खबर कागज पढ़े वाला बढ़ गइल बाड़े त खबर कागज छापे वाला के काम जरूरे बढ़ल होई। ई बात हम एह से कहत बानी मलिकार कि पांड़े बाबा के दुआर पर जुटान त रोजे होला, बाकिर एह घरी तनी बेसिए लोग जुटत बा। जेतने मुंह, ओतने वोट के बतकही। केहू इनरा गान्ही के पोता के बात करत बा त कई जने बड़का मोदी जी के। केहू इनका के नीमन आ उनका के बाउर कहत बा त कई जने ई कहे वाला बाड़े कि अबकी बेर ओइसन ना होई, जइसन पिछलका वोट में भइल रहे। माने मोदी जी के हवा ओइसन ना रही। लोग इहो बतिआवत बा कि टिकट खातिर एने से ओने कूदे-फाने के सीजन आ गइल बा। काल्ह ले जे दोसरा के गरियावत रहल हा, ऊ आज ओकरा गरे लागत बा। हमरा त इहे बुझाता मलिकार- ठांव गुने काजर, कुठांव गुने कारिख। एके करिया रंग नीमन जगहा लागे त काजर कहाला आ कुठांव लाग जाव त करिखा कहाला।

आज अमलोरी के अचला फुआ के बड़कू दामाद आइल बाड़े। ऊ कहत रहुअन कि जात-पात आ पाटी-पउआ पर अबकी वोट ना परी। सभे अपना पसन के आदमी जोहत बा। पांड़े बाबा टोकवीं- ए बाबू, अबही ले केतने वोट हम देखले बानी। हमरा त इहे बुझाता कि बिहार आ ऊपी (यूपी) में जात-पात के बिना वोट होइए ना सकेला। अइसन ना रहित जानी दुसमन मायावती आ मुलायम के बेटा गांठ ना जोरित लोग। ऊ लोग हिसाब क के देखले बा कि संगे रहला पर नान्ह जात के सगरी वोट मिल जाई। फूल छाप वाला मोदी जी के हालत खराब हो जाई।

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एगो अउरी बात पांड़े बाबा बतावत रहवीं कि नेतवा कुल के अकिल हेरा गइल बा। ओकनी के कवनो हाल में चुनाव लड़े के टिकट चाहीं। ई पाटी ना दी त ऊ पाटी से पावे खातिर बेंग अइसन कूदत-फानत रहियें सन। पहिले के नेता लोग के कुछ आपन नीत-सिद्धांत होत रहे। अब त सब भुला गइल। उहां के नीतीश कुमार के जिकिर करत रहवीं। पिछलका बेर दिल्ली के वोट में अलगे लड़ले। ओकरा बाद पटना के वोट में लालू के संगे हो गइले। फेर कूद के फूल छाप से सट गइले। अइसन केतने नेता बाड़े सन, जवन एने से ओने टिकट खातिर कूद-फान मचवले बाड़े सन।

पांड़े बाबा केहू के कवनो बात साफ-साफ समझाई ले। हमरा अइसन बकलोल मेहरारू के जब उहां के बात बुझा जाला त पढ़ल-लिखल लोग के समझे में अउरी आसानी होत होई। उहां से केहू पूछले रहुवे कि पप्पू कहले बाड़े कि उनकर सरकार बनी त सगरी गरीब के बारह हजार महीना बंटिहें। मोदी जी किसिम-किसिम के खैरात पहिलहीं से बांटत बाड़े। बांटे के बतकही करे में केहू पीछे नइखे। एइमें बूझे वाला बात ई बा कि पइसा कवनो गाछ के पतई ना ह। पाबलिक जवन पइसा टैक्स देले, ओही में से ई खैरात बांटत बा लोग। सैकड़ा 20 गो गरीब के पइसा बांटे के जवन बात पप्पू कहत बाड़े, ऊ पइसा सैकड़ा 80 लोग पर टैक्स लगा के जुटावल जाई। इहे ना, बड़का मोदी जी जेतना खेतिहर लोग के बांट रहल बाड़े, उहो लोगे से वसूल कइल पैइसा ह। केहू अपना घर से थोड़े दी।

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लोगवा के बतकही से हमरा अब बुझाये लागल बा मलिकार कि लोग दू हिस्सा में अपना के बांट लिहले बा। नेतवा जीतिहें सन भा हरिहें सन, बाकिर लोग आपस में कहीं दुसमनी ना मोल लेव, हमरा एही के डर लागल बा। लोग बतकही में भैंसा लड़ान अइसन लड़त बा। एही से डर लागत बा।

हमहू का लेके बइठ गइनी। बड़का कहते रहे कि अबकी ओकरा महंगा वाला घसेटउआ मोबाइल चाहीं। का त अब ऊ मैटिक पास होखे वाला बा। एकर धेयान राखेब। ऊ रउरा अइला के बाट जोहत बा। गांव-जवार के हाल ठीक बा।

राउरे, मलिकाइन   

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