बाढ़-सुखाड़ से निपटने के लिए एक्शन प्लान पर हो रहा है काम

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पटना। आपदा किसी के वश का चीज नहीं है लेकिन अपने प्रयास से उसके प्रभाव को कम किया जा सकता है, ताकि लोगों को आपदा का कष्ट कम से कम सहन करना पड़े। बिहार सरकार ने आपदा से निपटने के लिए बेहतर प्रबंधन के जरिए किसी तरह की आपदा के प्रभाव को कम करने की जरूरत पर काम कर रही है। हर आपदा से निपटने के लिए पहले से तैयारी को होना भी जरूरी है। राज्य सरकार ने बाढ़ पूर्व तैयारियों को करने के लिए गति तीव्र कर दी है।सूबे के सभी जिलाधिकारियों से संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति की निपटने के लिए जिलेवार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जानकारी लेने के बाद आवश्यक दिशा-निर्देश दिया जा चुका है।

वैसे भी बाढ़ से बचाव की तैयारी के साथ-साथ संभावित सुखाड़ की स्थिति से निपटने की पूर्ण तैयारी रखनी चाहिए। सुखाड़ की स्थिति में आकस्मिक फसल योजना का लाभ लोगों तक पहुंचे, इसके लिए सरकार ने डीजल अनुदान, नहरों में अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने, बिजली की पर्याप्त आपूर्ति, चापाकल की व्यवस्था की है ताकि सुखाड़ की स्थिति से निपटा जा सके और लोगों को किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। आकस्मिक फसल योजना के संबंध में कृषि विभाग को पूरी तैयारी कर लेने की जरुरत है ताकि लोगों को अधिक से अधिक सहुलियत हो। इस फसल योजना के अंतर्गत और जिन फसलों को शामिल करने की जरुरत है, उसका भी आकलन राज्य सरकार नेकर लिया है ।डीजल अनुदान वितरण में किसी तरह की कोई कोताही न हो इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश तक सरकार ने दे दिया है।

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डीजल खरीद में सरकार बिचड़ा एवं खरीफ फसल के लिए पांच बार डीजल अनुदान देती है। इस बार डीजल का दाम बढ़ा हुआ है, इसलिए अनुदान की दर बढ़ाकर देने की व्यवस्था की गई है ताकि किसानों को डीजल खरीदने में किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो।

किसानों को किसी प्रकार खेती करने में परेशानी न हो इसके लिएबिजली की आपूर्ति भी सुनिश्चित की गई है।समय से पूर्व लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग चापाकल की उपलब्धता और उसको चालू हालत में करने की तैयारी को शीघ्र पूरा करने के लिए निर्देश दिया गया है।पशुचारा, सुखा राशन, दवा की पूर्ण तैयारी हेतु राहत सामग्री का दर निर्धारण एवं आपूर्तिकर्ता सुनिश्चित करने के भी समीक्षा बैठक में निर्णय लिया गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से ऋतुकालीन वर्षा से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें यह जानकारी दी गई कि बिहार में आकलित औसत वर्षा (1027.6 मि0मी0) का लगभग 93 प्रतिशत वर्षा इस वर्ष संभावित है। बाढ़ की स्थिति में संसाधन मानचित्र, एन0डी0आर0एफ0 सुविधा, तैराकी, गोताखोर, नावों की संख्या, बाढ़ शरणस्थली में किसी प्रकार की कोई कमी न रह जाए इसको लेकर राज्य सरकार पूरी तरह से सख्त है। राहत सामग्रियों का दर निर्धारण एवं आपूर्तिकर्ता का चयन, जिला आपातकालीन संचालन केंद्र, फूड पैकेट्स का पैकेजिंग कार्य, नाव और नाव मालिकों की लंबित मजदूरी भी तय की जा चुकी है ताकि समय पर किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। बाढ़ आने से पूर्व ही जल संसाधन विभाग द्वारा बाढ़ प्रबंधन के लिए तटों की मरम्मती एवं सुरक्षा कर ली जानी है।मौसम विभाग ने इस बार वर्षा की अच्छी संभावना भी जतायी है।

मुख्यमंत्री ने जिले के प्रभारी सचिव/प्रधान सचिव तक को यह निर्देश दिया है कि अपने-अपने जिलों में जाकर सारी तैयारियों का आकलन एवं समीक्षा कर लेने का30 जून तक निर्देश दिया गया था। जिस पर अमल किया जा रहा है। साथ ही जिलाधिकारी के आपदा राहत कोष में वित्त विभाग से राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए ताकि बाढ़ आपदा की स्थिति में 24 घंटे के अंदर पीड़ितों को राशि उपलब्ध करायी जा सके। साथ ही अधिकारियों के नए तबादले के बाद ब्लॉक एवं अनुमंडल स्तर के पदाधिकारियों को आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से बाढ़ राहत संबंधी ट्रेनिंग/ओरियेंटेशन करा दी जाए ताकि वे अपना कार्य बेहतर ढंग से कर सकें ताकि आपदा की स्थिति में वो अपने कार्यों को सही तरीके से निपटा सके।

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