बंगाल में ममता बनर्जी के चुनावी वादे सच हुए तो बेरोजगारी फुर्र !

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घुसपैठ पर ममता बनर्जी का 2005 में जो स्टैंड था, वह ममता 2021 में भूल गयी हैं। किंतु संकेत हैं कि मतदाता उन्हें इस बार याद दिला देंगे!
घुसपैठ पर ममता बनर्जी का 2005 में जो स्टैंड था, वह ममता 2021 में भूल गयी हैं। किंतु संकेत हैं कि मतदाता उन्हें इस बार याद दिला देंगे!
  • डी. कृष्ण राव

कोलकाता। बंगाल में ममता बनर्जी के चुनावी वादे सच हुए तो बेरोजगारी वास्तव में खत्म हो जाएगी। पर ममता की घोषणा और भाषणों में ही फर्क नजर आता है। आंकड़ों पर भरोसा करना भी मुश्किल है। बुधवार को जारी तृणमूल कांग्रेस के घोषणापत्र में हर साल 5 लाख लोगों को रोजगार का वादा किया गया है। यानी 5 साल के शासन में 25 लाख लोगों को नौकरी। यह कितना संभव हो पायेगा, देखने वाली बात होगी। इसलिए कि 2 करोड़ लोगों को नौकरी देने की बात 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने भी की थी।

बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान होने में केवल 10 दिन बाकी हैं। ममता बनर्जी ने 66 पेज का घोषणापत्र जारी किया है। घोषणापत्र में कई बाते हैं, पर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रोजगार का है। पिछले एक महीने से राज्य के विभिन्न हिस्सों में  बेरोजगार  युवा, विभिन्न सरकारी संस्थाओं के  अस्थायी  कर्मचारी, टेट-नेट पास युवा  नौकरी के लिए धरने पर बैठे हैं। अस्थायी शिक्षकों ने जिस तरह  लगातार आंदोलन और  अनशन किया, वह ममता बनर्जी की इस वादे की सच्चाई बयां करने के लिए काफी हैं। यहां तक कि नौकरी की मांग को ले कुछ युवा गंगा पार कर ममता बनर्जी के घर तक पहुंच गए थे।

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इसे देखते रोजगार के वादे पर चर्चा जरूरी हो जाती है। ममता बनर्जी ने हर साल 5 लाख लोगों को नौकरी देने का वादा तृणमूल कांग्रेस के घोषणापत्र में किया है। यानी अगले 5 साल में कुल 25 लाख लोगों को नौकरी दी जाएगी। घोषणापत्र में ममता बनर्जी के वादे और जन सभाओं में उनके बयानों में विरोधाभास दिखता है। जनसभाओं में वह कहती फिर रही हैं कि अगले 5 साल में  डेढ़ करोड़ लोगों को नौकरी दी जाएगी। ममता बनर्जी मंच पर जो कह रही हैं और घोषणापत्र में जो लिखा है, उसमें काफी अंतर है।

ममता बनर्जी कह रही हैं कि बंगाल में 21 लाख बेरोजगार युवा हैं, जो देश के किसी भी राज्य से काफी कम हैं। इस आंकड़े में कितना पानी मिला हुआ है, उसका विश्लेषण अगर हो जाए तो  पाया  जाएगा कि  बंगाल के एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज में ही केवल 35 लाख युवाओं के नाम  पंजीकृत हैं। इसके अलावा हर साल 20 लाख युवा माध्यमिक और उच्च माध्यमिक पास करते हैं। ग्रेजुएशन और हायर स्टडी कोर्स को मिला लिया जाए तो करीब 23 से 24  लाख  बेरोजगार हर साल तैयार हो रहे हैं, जो 10 साल में दो करोड़ के आसपास हो जाते हैं। इससे हिसाब मिलाना बहुत कठिन हो रहा है कि कहां से 21 लाख बेरोजगार युवकों की संख्या ममता ने जुटायी है। हालांकि वह भी स्वीकार कर रही हैं कि पिछले 10 साल में 4 लाख सरकारी नौकरी लोगों को मिली है। वह यह भी कह रही हैं कि पिछले  10 साल में करीब 2 लाख युवाओं को हर महीना  डेढ़ हजार रुपये भत्ता मिला है, जबकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह  भत्ता बहुत सीमित संख्या में युवाओं को मिला है और वह भी अनियमित है।

ममता ने कहा है कि 2011 के बाद अभी तक पुलिस में 4 लाख लोगों की भर्ती हुई है। राजनीतिक जानकारों का  कहना है कि अगर 4 लोगों में सिविक वॉलिंटियर और सिविक पुलिस को भी शामिल कर लिया जाए  तब भी यह बात हजम नहीं होती कि इतनी संख्या में भर्ती हुई है। अपने घोषणापत्र में ममता ने यह भी कहा है कि  आने वाले  दिनों में 10 हजार छात्रों को  4  प्रतिशत ब्याज दर पर 10-10 लाख रुपये दिये जाएंगा, ताकि वे अपना उद्योग  लगा सकें। राजनीतिक जानकारों का इस विषय पर कहना है कि हाल ही में राज्य सरकार की एक योजना  की घोषणा की गई थी, जिसमें हर युवा को 2 लाख रुपये देने की बात कही गई थी, लेकिन वह योजना आज तक वास्तविकता में नहीं बदल पायी।

दूसरी ओर रोजगार से संबंधित बंगाल के औद्योगिक विकास पर ममता बनर्जी ज्यादा कुछ नहीं बोलीं। केवल इतना कहा कि अगले  5 साल में 10 लाख  एमएसएमई का गठन किया जाएगा,  जिसके लिए डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एमएसएमई लोन के तौर पर दिये जाएंगे। उनका यह भी दावा है कि राज्य में अभी तक 10 हजार बड़े उद्योग हैं और अगले 5 साल में 2000 बड़े उद्योग लगाये जाएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि  राज्य में अगर 10 हजार बड़े उद्योग  वास्तव में होते  तो राज्य के हर कोने से लाख-लाख युवा क्यों दक्षिण और उत्तर में दिल्ली, महाराष्ट्र की ओर भागते काम की खोज में। उनका यह भी तर्क है कि  कोविड के कारण पता चला कि राज्य के 50 लाख युवा  बंगाल के बाहर काम करते हैं।

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