न्यूरो रीजेनरेटिव रिहेबिलिटेशन थेरेपी के बाद पटना के अमन और वृषांक धीरे -धीरे जीवन में आत्मनिर्भरता हासिल कर रहे हैं

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पटना में निशुल्क स्टेमसेल थेरेपी ओपीडी शिविर का किया जाएगा आयोजन

पटना : अब तक यह माना जाता था कि जन्म के दौरान मस्तिष्क को होनेवाली क्षति अपरिवर्तनीय होती है। हालांकि अब उभरते अनुसंधान के साथ हम यह जान गए हैं कि सेल थेरेपी का उपयोग कर क्षतिग्रस्त मस्तिष्क के ऊतकों की मरम्मत संभव है। वहीं आज भी भारत में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने गर्भनाल रक्त बैंकों के माध्यम से अपने स्टेम कोशिकाओं को संरक्षित नहीं किया है। उन सभी रोगियों के लिए जिन्होंने न्यूरोलॉजिकल संबंधित विकारों के लिए एक नया इलाज खोजने की सारी उम्मीदें खो दी है वयस्क स्टेम सेल थेरेपी एक नई उम्मीद प्रदान करती है।

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एक हजार बच्चों में से हर तीन में से एक को प्रभावित
डॉ. नंदिनी गोकुलचंद्रन ने आगे कहा सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क पक्षाघात पैदा हुए प्रति एक हजार बच्चों में से हर तीन में से एक को प्रभावित करती है। हालांकि कम वजन के साथ और समय से पहले जन्मे शिशुओं में इसका प्रभाव ज्यादा देखा गया है। सेरेब्रल पाल्सी के अधिकांश कारणों का विशिष्ट उपचारात्मक इलाज नहीं है। हालांकि सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों में कई ऐसी चिकित्सा समस्याएं मौजूद होती हैं जिनका इलाज किया जा सकता है या जिनकी रोकथाम की जा सकती है। उपचार के प्रारंभिक चरण में एक इंटरडिसिप्लीनरी टीम शामिल होती है जिसमें एक बाल रोग विशेषज्ञ खासकर न्यूरो डेवलपमेंट विकारों के अनुभवी एक न्यूरोलॉजिस्ट या अन्य न्यूरोलॉजिकल प्रैक्टिशनर एक मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक एक आर्थोपेडिक सर्जन एक फिजिकल थेरेपिस्ट .

भौतिक चिकित्सक एक स्पीच थेरेपिस्ट और एक ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट का शुमार होता है। प्रभावित बच्चे के उपचार में टीम के हर सदस्य की महत्वपूर्ण भूमिका और स्वतंत्र योगदान होता है। हालांकि ये उपचार विकल्प इन मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक होते हैं लेकिन समस्या को जड़ से खत्म करने में कारगर नहीं होते हैं। मॉडर्न मेडिकल साइंस और अनुसंधानों से सेरेब्रल पाल्सी में स्टेम सेल के जरिए विनाशकारी प्रभावों को नियंत्रित करने की क्षमता स्पष्ट हुई है।

न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट बिहार में रहनेवाले न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के सभी मरीजों के लिए 28 सितम्बर 2019 को पटना में एक निःशुल्क कार्यशाला सह ओपीडी परामर्श शिविर का आयोजन कर रहा हैं। न्यूरोजेन को एहसास है कि स्पाइनल कॉर्ड इंजुरीए मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी ऑटिज्म सेरेब्रल पाल्सी इत्यादि विकारों से पीड़ित मरीजों को सिर्फ परामर्श के उद्देश्य से मुंबई तक की यात्रा करना काफी तकलीफदेह होता है इसलिए मरीजों की सुविधा के लिए इस शिविर का आयोजन किया जा रहा है। असाध्य न्यूरोलॉजिकल विकारों से पीड़ित मरीज इस निःशुल्क शिविर में परामर्श हेतु समय लेने के लिए पुष्कला से 09821529653 / 09920200400 पर संपर्क कर सकते हैं।

न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट के निदेशक एलटीएमजी अस्पताल व एलटीएम मेडिकल कॉलेज सायन के प्रोफेसर व न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक शर्मा ने कहा  सेरेब्रल पाल्सी मानसिक मंदता मस्कयुलर डिट्रॉफी रीढ़ की हड्डी में चोट लकवा ब्रेन स्ट्रोक सेरेब्रेलर एटाक्सिया अनुमस्तिष्क गतिभंगद्ध और अन्य न्यूरोलॉजिकल मस्तिष्क संबंधी विकार जैसी स्थितियों में स्टेम सेल थेरेपी उपचार के नए विकल्प के तौर पर उभर रही है इसी कारण से इस उपचार में आण्विक संरचनात्मक और कार्यात्मक स्तर पर क्षतिग्रस्त तंत्रिका ऊतकों की मरम्मत करने की क्षमता है।

स्टेम सेल थेरेपी एससीटी बेहद सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है

न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की उप निदेशक व मेडिकल सेवाओं की प्रमुख डॉ नंदिनी गोकुलचंद्रन ने कहा न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट में दी जानेवाली स्टेम सेल थेरेपी एससीटी बेहद सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में एक सुई की मदद से मरीज के स्वयं के बोन मैरो ;अस्थि मज्जा से स्टेम सेल ली जाती हैं और प्रसंस्करण के बाद उसके स्पाइनल फ्लुइड ;रीढ़ की हड्डी में तरल पदार्थद्ध में वापस इंजेक्ट की जाती हैं। चूंकि इन कोशिकाओं को मरीज के शरीर से ही लिया जाता है ऐसे में रिजेक्शन ;अस्वीकृति और साइड इफेक्ट ;दुष्प्रभाव का खतरा नहीं रहता है जो एससीटी को पूरी तरह से एक सुरक्षित प्रक्रिया बनाता है।

न्यूरोजेन ब्रेन ऐंड स्पाइन इंस्टीट्यूट की उपनिदेशक व चिकित्सीय सेवाओं की प्रमुख डॉ. नंदिनी गोकुलचंद्रन ने कहा अमन और वृषांक को आत्मनिर्भर बच्चे के रूप में देखकर हमें बेहद खुशी है। न्यूरो रीजेनरेटिव रिहैबिलिटेशन थेरेपी मरीजों के जीवन को बदलकर रख देनेवाले सुधार लाती है। यदि चिकित्सा एक या दो वर्ष की आयु में की जाती हैए तो यह बच्चे को विकार से तेजी से छुटकारा पाने में कारगर होता है। एनआरआरटी अभिभावकों के संघर्षों में सकारात्मकता और प्रेरकता लाकर निश्चित तौर पर उनके जीवन में भी बदलाव लाती है।

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