दुनिया के संरक्षण के लिए वैदिक गणित है काफी बहुमूल्य

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वैदिक गणित का स्वरूप एवं उसकी प्रासंगिकता पर CUSB में हुई चर्चा

गया : दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी ने वैदिक गणित का स्वरुप एवं उसकी प्रासंगिकता पर बुधवार (दुनिया के संरक्षण के लिए वैदिक गणित है काफी बहुमूल्य) को एक विशेष व्याख्यान दिया. इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन विवि के गणित विभाग द्वारा नव-उद्घाटित स्वामी विवेकानंद व्याख्यान सभागार में किया गया जिसमें बड़ी संख्या में प्राध्यापकगण, अधिकारीगण, कर्मचारी एवं विद्यार्थीगण मौजूद थे .

वैदिक गणित की विशेषता

संबोधन में जगद्गुरु ने वैदिक गणित की विशेषताओं को भागवत गीता, वैद एवं अन्य धार्मिक ग्रंथों के परिदृश्य में सभागार में उपस्थित लोगों के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि मैंने अध्ध्यन में पाया की वैदिक गणित में 16 सूत्र एवं 22 उपसूत्र है जो आज भी देश और दुनिया में काफी प्रासंगिक है। आज पुरे विश्व में किसी भी तरह का विज्ञान हो उसमें वैदिक गणित के सूत्रों का प्रयोग होता है। यही नहीं अंतरिक्ष विज्ञान में इसका उपयोग होता है . आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कंप्यूटर भी वैदिक गणित पर आधारित है। स्वामी जी ने अपने व्याख्यान में मानव जीवन में नींद की आवश्यकता एवं उसके व्यापक पहलुओं को बताते हुए कहा चाहे आस्तिक हो या नास्तिक, वैदिक हो या अवैदिक सबको इसकी आवश्यकता होती है।

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काल्पनिक विकास की तरफ बढ़ना है गलत

उन्होंने वैदिक गणित एवं समकालीन गणित तथा विज्ञान के कई तथ्यों को साझा किया जिसमें न्यूटन द्वारा गुरुत्वाकर्षण पर दिए गए सिद्धांतों का भी जिक्र आया। स्वामी ने यह चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सम्पूर्ण विश्व भौतिक उत्कृष्टता और काल्पनिक विकास की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है लेकिन इसके कई दोष हैं और कहीं- न-कहीं यह शृष्टि को नष्ट करने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि भौतिकवादियों के चंगुल से विश्व को अगर मुक्त नहीं किया जाए तो विश्व की समाप्ति और मानव की शृष्टि आने वाले कुछ दशकों में निश्चित है। जगद्गुरु ने कहा कि समय आ गया है कि हम वैदिक गणित में दिए गए सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं तभी इस शृष्टि को भौतिक वादियों से बचाया जा सकता है।

इससे पहले कार्यक्रम की औपचारिक शुरुवात जगद्गुरु के साथ माननीय कुलाधिपति डॉ० सी० पी० ठाकुर, माननीय कुलपति प्रोफेसर हरीशचन्द्र सिंह राठौर एवं डॉ० इंदिरा झा, संयोजिका, गोवर्धन मठ आदि ने दीप प्रज्जवलित करके किया .इसके पश्चात विवि के छात्र – छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किया .पवित्र पादुका पूजन, स्वामी जी के जीवनवृत का संक्षिप्त प्रस्तुतीकरण, स्वामी जी के निज सचिव द्वारा विरुदावली पाठ आदि भी कार्यक्रम के अहम भाग थे.

कुलाधिपति ने क्या कहा

जगद्गुरु को माल्यार्पण एवं अंगवस्त्रम भेंट करने के पश्चात माननीय कुलपति ने औपचारिक स्वागत भाषण प्रस्तुत किया .अपने भाषण में माननीय कुलपति प्रोफेसर राठौर ने हृदय की गहराइयों से स्वामी जी का विवि में उद्बोधन के लिए आगमन पर अभिनन्दन करते हुए आभार प्रकट किया. उन्होंने कहा विवि के स्थाई कैंपस के औपचारिक क्रियाकलाप के प्रारंभ होने बाद पहली बार किसी संत का आगमन हुआ है जो सबके लिए सौभाग्य की बात हैं. प्रोफेसर राठौर ने यह आशा जताई कि स्वामी के आगमन एवं आशीर्वाद से विवि काफी विकास करेगा और उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में अपने को स्थापित करेगा .

उनके बाद माननीय कुलाधिपति डॉ० सी० पी० ठाकुर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अखंड भारत में स्वतंत्रता से पहले बिहार का शिक्षा के छेत्र में काफी नाम था, पटना विश्वविद्यालय को देश के सर्वश्रेष्ठ पाँच शिक्षण संस्थानों में गिना जाता था . लेकिन चिंता की बात है कि पटना विवि अब काफी पिछड़ गया है, लेकिन अभी भी आशा करनी चाहिए कि सीयूएसबी जैसे विवि उत्कृष्ठ प्रदर्शन से बिहार को दोबारा गर्वानावित करेंगे .

स्वामी जी के उदबोधन के बाद माननीय कुलपित ने उन्हें और कुलाधिपति को स्मृति चिन्ह भेंट किया .इस विशेष कार्यक्रम के समनवयक सीयूएसबी के गणित विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर हरे कृष्ण निगम थे जिन्होंने उद्बोधन के उद्देश्यों को संक्षेप में बताया .मंच सञ्चालन इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ० सुधांशु कुमार झा ने किया, , जबकि कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद् ज्ञापन डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्लू) प्रोफेसर आतिश पराशर ने दिया.

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