झारखंड विकास मोर्चा का नाम 13 साल बाद मिट जाएगा!

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बाबूलाल मरांडी
बाबूलाल मरांडी

रांची। झारखंड विकास मोर्चा 13 साल बाद अब इतिहास की बात हो जाएगी। बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में बने झाविमो का भाजपा में विलय के दिन करीब हैं। वर्ष 2000 में झारखंड गठन के बाद पहली भाजपा सरकार में मरांडी मुख्यमंत्री बने थे। स्थानीयता के मुद्दे पर मचे घमासान के बाद उनकी जगह अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बनाया गया। इससे नाराज होकर बाबूलाल भाजपा से अलग हो गये और झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) नाम से पार्टी बना ली थी।

इस बीच बाबूलाल भाजपा के खिलाफ लगातार हमलावर रहे। उनकी खुन्नस तब और ज्यादा हो गई, जब 2014 के विधानसभा चुनाव में निर्वाचित उनके 9 विधायकों में 6 को बीजेपी ने तोड़ लिया। दल बदल कानून के दायरे में विधानसभा के स्पीकर के पास इस बारे में केस चलता रहा। सत्रावसान तक निर्णय बाबूलाल मरांडी के पक्ष में नहीं आया। उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया।

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2019 में हुए विधानसभा चुनाव में जेवीएम ने सर्वाधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। महज तीन ही जीत पाए, जिनमें पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की थे। मरांडी को इस बात की आशंका थी कि पिछली बार की तरह इस बार भी उनके साथी दगा दे सकते हैं। यहीं से मरांडी के भाजपा की ओर झुकाव की बुनियाद पड़ी। वास्तव में प्रदीप यादव और बंधु तिर्की सत्ताधारी गठबंधन के घटक दलों में अपनी जगह तलाशने लगे थे।

इस बीच बाबूलाल की बातचीत बीजेपी के शीर्ष नेताओं से होती रही। कभी बाबूलाल जी अज्ञातवास पर रहे तो कभी उनकी मुलाकात दिल्ली में भाजपा नेताओं से होने की चर्चा रही। दरअसल इन मुलाकातों में वे दल बदल कानून से बचने के लिए तरीके तलाशने में मशगूल रहे। विधिवेत्ताओं से सलाह लेते रहे।

आखिरकार उन्होंने विधि सम्मत रास्ता चुना और सबसे पहले कार्यसमिति भंग कर दी। पुरानी कार्यसमिति के सदस्यों प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को नई कार्यसमिति में जगह नहीं मिली। इसके बाद विरोधी गतिविधियों के नाम पर बंधु तिर्की को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

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अगली बारी प्रदीप यादव की थी। पार्टी ने उन्हें शो काज दिया, जिसका उन्होंने कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझा। उन पर आरोप लगा कि उन्होंने बंधु तिर्की के साथ दिल्ली में कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात की। साथ ही पार्टी लाइन से हटकर काम किया। प्रदीप के निष्कासन की प्रक्रिया भी आजकल में पूरी हो जाएगी। उसके बाद बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का विलय भाजपा में आसानी से हो जाएगा।

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 15 फरवरी को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा रांची आ सकते हैं। उनकी मौजूदगी में तामझाम के साथ जेवीएम का विलय भाजपा में हो जाएगा। इसी के साथ 13 साल बाद बाबूलाल मरांडी की भाजपा में वापसी भी हो जाएगी और जेवीएम इतिहास की पार्टी बनकर रह जाएगी।

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