झारखंड में विकास की राशि सरेंडर की परंपरा बंद करे हेमंत सोरेन सरकार

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झारखंड स्वास्थ्य सेवा के मार्च 2022 तक सेवानिवृत होने वाले चिकित्सकों को राज्य सरकार ने सेवा अवधि में विस्तार करने का निर्णय लिया है।
झारखंड स्वास्थ्य सेवा के मार्च 2022 तक सेवानिवृत होने वाले चिकित्सकों को राज्य सरकार ने सेवा अवधि में विस्तार करने का निर्णय लिया है।
विजय शंकर नायक
विजय शंकर नायक

रांची। झारखंड में विकास की राशि सरेंडर की भाजपा कि पुरानी परंपरा हेमंत सोरेन सरकार को अब बंद कर देना चाहिए। कई विभागों ने 25% राशि भी खर्च नहीं की। हेमंत सोरेन को विकास की राशि शत प्रतिशत गुणवत्ता युक्त रूप से खर्च करने की योजना पर काम और फोकस करना चाहिए, ताकि बिना खर्च किए ही गरीब राज्य की गरीब जनता का पैसा सरेंडर न हो सके। उपरोक्त बातें झारखंडी सूचना अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने यह भी कहा कि विकास मद के 8 हजार करोड़ रुपये सरेंडर करना झारखंड की गरीब-गुरबा जनता के साथ अन्याय है।

नायक ने यह भी कहा कि जिस प्रदेश में भूख से मौतें होती हों, एंबुलेंस एवं सड़क के अभाव में ग्रामीणों की मौत होती हो, रोजगार के अभाव में पलायन होता हो, उस राज्य में विकास की राशि शत प्रतिशत खर्च नहीं होना काफी दुख का विषय है। सबसे दुख का विषय है कि जिस विभाग को ज्यादा से ज्यादा रोजगार सृजन करने की योजना पर राशि खर्च करने की आवश्यकता थी, उस श्रम नियोजन विभाग में मात्र बजीय प्रावधान का 21.93% ही खर्च किया गया।

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दूसरी ओर पर्यटन के विकास की भी अनदेखी की गयी। ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने में तत्परता नहीं दिखाई गई। पर्यटन विभाग ने मात्र 15.26% ही राशि खर्च की। इसी तरह कला संस्कृति विभाग में मात्र 20.08% ही खर्च किया गया, तो अनुसूचित जाति/ जनजाति/ अल्पसंख्यक विकास में कल्याण विभाग में रुचि नहीं दिखाई, जिसका परिणाम यह है कि कल्याण विभाग में मात्र 24.89% राशि ही खर्च की गयी।

खनन विभाग ने भी खनन क्षेत्रों के विकास में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। खान भूतत्व विभाग ने मात्र 21.93% राशि ही खर्च की। झारखंड में उद्योग विभाग ने उद्योगों के विकास में भी कोई योजनाबद्ध तरीके से काम नहीं किया। विभाग ने आवंटित राशि का 39.76% ही खर्चे किया। वहीं पशुपालन विभाग पशुपालन के विकास की दिशा में कुछ विशेष नहीं कर पाया। विभाग ने 22.02%  राशि ही खर्च की। डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन के विकास में भी विभाग ने कोई विशेष खर्च नहीं किया। मात्र 20.70% ही खर्च हुआ। सहकारिता विभाग भी 24.57% ही खर्च कर पाया।

नायक में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से राज्य हित में अनुरोध किया कि वे श्रम विभाग, पर्यटन विभाग, कला-संस्कृति विभाग, कल्याण विभाग, खान एवं भूतत्व विभाग, उद्योग विभाग, पशुपालन डेयरी विभाग, सहकारिता विभाग की मॉनिटरिंग करें, ताकि अगले वित्तीय वर्ष 22 23 में शत-प्रतिशत विकास की राशि को जनहित में खर्च किया जा सके।

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