झारखंड बंद के दौरान दिखे दृश्यों के संकेत गंभीर हैं

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रांची। विपक्षी दलों द्वारा झारखंड ‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम’ के विरोध में आहूत झारखंड बंद की सफलता इस बात का इशारा है कि आगामी विधान सभा का चुनाव रघुवर दास के लिये काफी मुश्किल भरा हो सकता है। विपक्षी दलों द्वारा उक्त बंद की घोषणा के बाद से जिस तरह की बेचैनी रघुवर सरकार में देखी गई और इसके प्रतिक्रिया स्वरूप बंद को विफल करने जिस तरह की घोषणाएं करके विपक्षियों को डराया गया कि लग रहा था मानों 5 जुलाई को राज्य में कर्फ्यू की घोषणा की जा रही है। बता दें कि 5 जुलाई के बंद को विफल करने की योजना का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक सप्ताह पहले से ही प्रशासनिक स्तर से बंद को कैसे विफल करना है, का पूर्वाभ्यास हो रहा था और मीडिया द्वारा बड़े स्तर पर उसका प्रचार भी किया जा रहा था।

दो दिन पहले से विपक्षी दलों के कुछ नेताओं के खिलाफ वारंट निकाल कर गिरफ्तार किया गया, ताकि जनता और पार्टी कार्यकर्ता इतना डर जाएं कि बंद के समर्थन में सड़क पर निकलने की कोई हिम्मत नहीं कर सके। मगर बंद की सफलता ने रघुवर सरकार की तमाम कोशिशों पर पानी फेर दिया। पूरे राज्य में आवागमन पूरी तरह ठप्प रहा। विपक्ष के विभिन्न दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं व उनके समर्थकों को झंडा—बैनर के साथ सड़क पर उतरते देखा गया। चूंकि वाहनों का स्वत: स्फूर्त परिचालन बंद रहा, क्योंकि स्कूल बसों को बंद से मुक्त रखने की घोषणा के बावजूद राज्य के तमाम निजी विद्यालय बंद रहे, वहीं सरकारी स्कूल के विद्यार्थी ही नहीं आए, अत: बंद समर्थकों को ऐसा कुछ नहीं करना पड़ा जिससे पुलिस प्रशासन से उन्हें उलझना पड़ता, बावजूद पुलिस ने बंद समर्थकों को गिरफ्तार कर थाने ले गई और कुछ घंटों के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

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जहां कई जिलों में गिरफ्तार किए गए बंद समर्थको को कुछ घंटों में ही छोड़ दिया गया वहीं रांची में गिरफ्तार किए गए बंद समर्थकों को मोहराबादी मैदान के स्टेडियम में रखा गया, जिन्हें पांच बजे शाम को छोड़ा गया। दूसरी तरफ धनबाद में झामुमो के देबू महतो को उनके समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर सदर थाना के हाजत में डाल दिया गया। इस तरह की घटना पहली बार देखी गई कि बंद समर्थक को हाजत में बंद किया गया हो।

बंद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि ‘विपक्ष के झारखंड बंद को जनता ने विफल कर दिया।’ उन्होंने अपने पुराने सुर को दाहराया कि ‘हमने भूमि अधिग्रहण कानून में छेड़छाड़ नहीं की है बल्कि उसका सरलीकरण किया है। भूमि देने के बाद लोगों को दो से ढाई साल मुआवजा मिलने में लग जाते  थे। अब 8 माह में उन्हें मुआवजा मिल जाएगा।’

दूसरी तरफ भाकपा माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद कहते है कि ‘बंद अभूतपूर्व रहा। रघुवर सरकार के कार्यकाल के तमाम बंद कार्यक्रमों में यह बंद सबसे बेहतर रहा।’ वे कहते हैं कि ‘पिछले एक सप्ताह से सरकार द्वारा इस बंद को विफल करने के तमाम प्रयास किए गए, आनन—फानन में वारंट निकलवा कर गिरफ्तारियां की गईं। मगर जनता ने बंद को सफल करके रघुवर सरकार की अलोकतांत्रिक एवं दमननात्मक नीतियों का जवाब दिया है। अत: तमाम विपक्षी दल कल 6 जुलाई को जनता का धन्यवाद ज्ञापन करेंगे।’

समाज सेवी रतन तिर्की कहते हैं कि ‘यह बंद इस बात की घोषणा है कि झारखंडी जनता किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देगी।’

 

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