झारखंड का बकाया दिलाने के लिए पीएम को पत्र क्यों नहीं लिखते बाबूलाल मरांडी

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झारखंड का बकाया दिलाने के लिए पीएम को पत्र क्यों नहीं लिखते बाबूलाल मरांडी। यह कहना है झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) प्रवक्ता डॉ तनुज खत्री का।
झारखंड का बकाया दिलाने के लिए पीएम को पत्र क्यों नहीं लिखते बाबूलाल मरांडी। यह कहना है झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) प्रवक्ता डॉ तनुज खत्री का।

रांची। झारखंड का बकाया दिलाने के लिए पीएम को पत्र क्यों नहीं लिखते बाबूलाल मरांडी। यह कहना है झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) प्रवक्ता डॉ तनुज खत्री का। उन्होंने कहा है कि बात-बात पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखनेवाले बाबूलाल मरांडी केंद्र की कोयला और लोहा कंपनियों पर झारखंड का हजारों करोड़ बकाया देने के लिए पीएम को पत्र क्यों नहीं लिखते।

उन्होंने कहा कि वे यह क्यों नहीं कहते कि झारखंड का जीएसटी का हिस्सा केंद्र राज्य को दे दे, जिससे कोरोना संकट से निपटने की दिशा में सरकार बेहतर कार्य की सके। उनकी पत्र लेखन कला केवल सीएम तक क्यों सीमित रहती है। वे प्रवासी श्रमिकों के लौटने के लिए अधिक से अधिक ट्रेनें चलाये जाने की मांग क्यों नहीं करते। यदि उन्होंने एक बार भी यह मांग की होती तो प्रवासी मजदूरों की हालत ऐसी नहीं होती।

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कोरोना आपदा की शुरूआत होने के बाद महागठबंधन की हेमंत सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए जिस तरह से योजना बनायी, उसकी प्रशंसा पूरे देश में हुई। देश में वे इकलौते ऐसे मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए ट्रेन चलाये जाने की मांग की। प्रवासियों को लाने के लिए केंद्र से प्लेन की मांग कर रहे हैं।

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पूर्व की भाजपा सरकार की ओर से खाली खजानेवाला राज्य मिलने के बाद भी हेमंत सोरेन की सरकार ने अपनी आय के सीमित स्रोतों से आपदा की घड़ी में जनता के हितों का ख्याल रखा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का दिल इतना बड़ा है कि वे प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए चार्टर्ड फ्लाइट चलाने की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं। सरकार के प्रयासों से हाइवे में भी कम्यूनिटी किचन के जरिये लोगों को खाना मुहैया कराया जा रहा है। पर भाजपा आपदा में भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है। बाबूलाल मरांडी को वर्तमान समय में राजनीति छोड़कर जनहित में सरकार को सहयोग करना चाहिए।

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