क्रिकेट में माइक गैटिंग बनाम शकूर राणा विवाद आपको याद होगा 

0
230
अंपायर-खिलाड़ी विवाद
अंपायर-खिलाड़ी विवाद
  • वीर विनोद छाबड़ा 

क्रिकेट में माइक गैटिंग बनाम शकूर राणा विवाद शायद आपको याद हो। क्रिकेट खिलाड़ियों और अंपायरों के बीच तू-तू मैं-मैं कोई नई बात नहीं है। मोहल्ला स्तर के मैचों में तो अक्सर मार-पीट तक की नौबत आ जाती है। लेकिन इंटरनेशनल मैच में ऐसा होना बहुत अशोभनीय दृश्य है, क्रिकेट की भद्रता पर आंच आती है।

यह भी पढ़ेंः सचिन तेंदुलकर अंपायरों के निशाने पर सबसे ज्यादा रहे

- Advertisement -

8 दिसंबर 1987 को फ़ैसलाबाद टेस्ट में कुछ ऐसा ही हुआ था।  इंग्लिश कप्तान माइक गैटिंग और पाकिस्तानी अंपायर शकूर राणा में भिड़ंत की स्थिति पैदा हो गयी। गरमागरम बहस हुई। बॉडी लैंग्वेज तो बता रही थी कि गाली-गलौज भी ज़रूर हुई होगी। गुस्से से एक-दूसरे को उंगलियां दिखाई गयीं।

यह भी पढ़ेंः यह वही रांची हैं, जहां एक ईसाई संत ने रामकथा लिखी

दरअसल, ये दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन के क्लोज़िंग मोमेंट्स थे। इंग्लैंड के 292 के जवाब में पाकिस्तान की हालत बहुत पतली थी, 106 पर 5 विकेट। तब सलीम मलिक 54 पर थे और स्पिनर एडी हम्मिंग्स को फेस कर रहे थे। गैटिंग ने फील्ड सेट की। हम्मिंग्स ने बाल डाली, लेकिन तभी स्क्वायर लेग अंपायर शकूर राणा चिल्लाये, रुको, रुको। दूसरे अंपायर खिज़र हयात ने फ़ौरन इसे नो बॉल डिक्लेयर कर दिया। गैटिंग ने राणा से पूछा, क्या हुआ? राणा ने कहा, तुम  बेईमान हो। बैट्समैन के पीछे धोखे से फील्डर खड़ा कर रहे हो। गैटिंग ने कहा, ऐसा बिलकुल नहीं है। मैंने बैट्समैन को बता दिया था कि पीछे फील्डर खड़ा कर रहा हूँ। लेकिन इधर हम्मिंग्स ने ओवर शुरू कर दिया तो मैंने उसे हाथ से ईशारा कर रुकने के लिए कहा था। लेकिन राणा नहीं माने। बात इतनी बढ़ी कि  मैच रुक गया।

यह भी पढ़ेंः अब खुद अपनी तकदीर सवारेंगी बिहार की महिलाएं

अगले दिन की सुबह। सबने सोचा, बात आयी-गयी हो गयी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अंदरखाने कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी। इंग्लिश टीम फील्डिंग के लिए बाहर आई लेकिन दोनों अंपायर और बैट्समैन नहीं आये। राणा अड़ गए कि जब तक गैटिंग लिखित माफ़ी नहीं मांगेंगे तब तक वो बाहर नहीं आएंगे। इधर गैटिंग ने साफ़-साफ़ मना कर दिया, माफ़ी नहीं मांगूंगा। दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड्स इन्वॉल्व हुए। विदेश मंत्रालयों ने भी दखल दिया। टेस्ट मैच के इस तरह से रद्द होने से क्रिकेट की भी बदनामी है। बड़ी मुश्किल से गैटिंग माफ़ीनामा लिखने को तैयार हुए, मगर इस शर्त पर कि राणा भी माफीनामा देंगे। ख़ैर, खेल शुरू हुआ। मगर पूरा दिन बर्बाद हो गया। अंततः मैच ड्रा हो गया। लेकिन राणा पाकिस्तानी अवाम के हीरो बन गए।

यह भी पढ़ेंः आदिवासियों की पीड़ा आदिवासी अफसर ही समझ सकते हैं

लेकिन ड्रामा अभी बाकी था। पाकिस्तानी बोर्ड ने कराची टेस्ट के लिए राणा और शक़ील ख़ान को अंपायर घोषित किया। अब बारी गैटिंग की टीम की थी। उन्होंने शर्त रख दी, इन दोनों अंपायरों को हटाओ अन्यथा हम इंग्लैंड लौट जाएंगे। पाकिस्तान ने 1982 का हवाला दिया, जब अंपायर डेविड कांस्टेंट को हटाने की पाकिस्तानी मांग इंग्लैंड ने ठुकरा दी थी। मगर इंग्लिश टीम अड़ी रही। दोनों मुल्कों के भविष्य में क्रिकेट के रिश्ते सामान्य रहें, इस तथ्य के मद्देनज़र पाकिस्तान को झुकना पड़ा। राणा और शक़ील की जगह खिज़र हयात और महबूब ख़ान अंपायर डिक्लेयर हुए। शकूर राणा का 2001 में 65 साल की उम्र में निधन हो गया। वो ताउम्र अपने तकिये के नीचे गैटिंग का माफ़ीनामा रख कर सोते रहे, ‘फील प्राउड’ महसूस करते रहे। कई साल बाद उनका गैटिंग से सामना हुआ। गैटिंग ने हाथ बढ़ाया तो वो बोले, ओह गॉड, यू नॉट अगेन।

यह भी पढ़ेंः दिलीप सरदेसाई, भारतीय क्रिकेट के नवजागरण के लिए जाने गए 

- Advertisement -